BAREILLY COLLEGE, BAREILLY

 

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DEPARTMENT OF HINDI

 
 

MANDATORY DISCLOSURES

Although Hindi as a subject was being taught at Bareilly College right from the very beginning, Post graduate studies in it started in, as late as 1940. Pandit Radheyshyam Kathavachak eminent play write and poet of yore was the moving force behind the establishment of independent Hindi department in the college. Earlier Hindi was a part of the Sanskrit department which wad headed by the all time great scholar Pandit Bholanath Sharma. Prof Sridhar Pant was the founding head of the Hindi department. He was succeeded by Dr Gunanand Juyal, Dr K L Jain, Dr Jyoti Swaroop and then Dr B S Bhardwaj respectively.
Over four hundred research scholars have been guided to Ph.D, degree by different teachers of the Hindi department.

 

Book Cover

 

 

 

Dr Manager Pandey Visits Bareilly College (22nd Feb 2010)

बरेली। जेएनयू के अवकाश प्राप्त शिक्षक और प्रसिद्ध समालोचक डा. मैनेजर पांडेय ने आज यहां कहा कि पदमश्री और इस तरह के दूसरे सम्मान सत्ता के करीबियों के नाम रिजर्व से हो गये हैं। उन्होंने कहा कि पुरस्कार चाहे जिसे मिले लेकिन समाज अच्छे साहित्य को ही सराहता है। श्री पाण्डेय बरेली कालेज में हिन्दी विभाग की तरफ से आयोजित 'सत्ता साहित्य और समाज' विषयक लेक्चर दे रहे थे।

श्री पांडेय ने लेक्चर में साहित्यकारों के चार रूप सामने रखे। उन्होंने कहा कि साहित्यकार जब कभी सत्ता का समर्थन करता है तो सत्ताधारी महानायक बन जाता है। इसके लिए उन्होंने शिवाजी को महानायक बनाने में भूषण के योगदान को सामने रखा। सत्ता से उदासीनता के लिए कुंदनदास का उदाहरण दिया। कहा कि जो साहित्यकार जीवन में सुविधा चाहते हैं, दुविधा में साहित्य लिखते हैं, जिसके दो अर्थ निकलते हैं। सत्ता के आलोचक के तौर पर सूरदास और प्रेमचंद के साहित्य को सामने रखा। उन्होंने कहा कि बहुतेरे साहित्यकारों ने सत्ता से सीधे-सीधे संघर्ष किया। ऐसे साहित्यकार जनवादी कहलाये। आज स्थिति विपरीत है, पूंजीवाद का समर्थन करने वालों को प्रगतिशील कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सत्ता के विरोधियों के साहित्य पर पाबंदी लगाने का चलन ऐसा अंग्रेजों के जमाने से है लेकिन इसका अनुसरण लोकतांत्रिक सरकारों ने भी किया। यहां तक कि पदमश्री जैसे सम्मान सत्ता के करीबी साहित्यकारों को ही मिलते हैं। उन्होंने कहा कि यह भी सच है कि एक अकेली किताब सत्ता को चुनौती पेश कर सकती है।

उन्होंने कहा कि खुशी इस बात की है कि समाज को अच्छे साहित्य की पहचान है। लेक्चर में साहित्यकार डा. मदुरेष, आशीष विद्यार्थी भी मौजूद रहे। प्राचार्य डा. आरपी सिंह ने लेक्चर को छात्रों के लिए ज्ञानवर्धक बताया। स्वागत डा. वीरेन डंगवाल और आभार हिन्दी के विभागाध्यक्ष डा. अशोक उपाध्याय ने व्यक्त किया।

 

 

Faculty Members

Dr SHYAM PAL MAURYA (In Charge)
Dr PARAMJEET KAUR
Dr MEENA YADAV
Dr SUSHMA GONDIYAL
Dr (Mrs)NIRUPAM SHARMA (MANDEYA POST)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

FACULTY OF ARTS

 

FACULTIES
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